यह प्रश्न बच्चे ख़ुद से ईमानदारी से पूछें,। अधिकाशत: ऐसा होता है कि माता-पिता याद दिलाते हैं कि क्लास का टाइम हो रहा है, बैठो, पढ़ो। बार-बार टोकने से काम करने में ख़ुद की रुचि नहीं होती। अरुचि से किए काम से ऊब तो होगी ही। इसलिए बच्चों को ख़ुद क्लास के लिए पहल करनी होगी, पूरे उत्साह से क्लास की तैयारी करें। रूचि से किये गये काम में हमारा दिमाग भी बहुत ज्यादा काम करता है |
यह महत्वपूर्ण है आजकल इंटरनेट पर बहुत सारी जानकारियां उपलब्ध हैं। जो पढ़ा है, उससे जुड़ी जानकारियां ढूंढना और पढ़ना, ना सिर्फ़ पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ाएगा, बल्कि बहुत सारी अतिरिक्त नॉलेज मिलेगी। जब तैयारी अच्छी होगी, तो अगली क्लास के लिए बच्चे दोगुने उत्साह का अनुभव करेंगे।कक्षा के बाद फिर से पढ़ें, कुछ शोध करें, यह बहुत अच्छा देखने की बात होगीआपका मन उस कार्य को करने में अधिकाधिक लगा रहेगा क्योंकि जैसे भोजन से पेट की भूख तृप्त होती है, वैसे ही ज्ञान हमारी मानसिक भूख को बुझाता है।
क्लास रूम में संवाद होगा, सही प्रश्न पूछे जाएंगे, तो सीखने का आधार भी अच्छा बनेगा। अगर बच्चे अपने विषय को पढ़कर क्लास के लिए बैठेंगे, तो सही प्रश्नों के ज़रिए अर्जित ज्ञान को मज़बूती दे पाएंगे।इसलिए हमें क्लास में अपने सवाल जरूर पूछने चाहिए | महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन कहते हैं - याद रखें, यदि आप अपनी शंकाओं को दूर करते हैं, तो लोग आपको 5 मिनट के लिए पागल समझ सकते हैं। लेकिन याद रखें, अगर आपमें पूछने की हिम्मत नहीं है, तो उसे जीवन भर पागल माना जा सकता है।
देखा गया है कि ऑनलाइन क्लास लेने वाले 85 प्रतिशत बच्चे मोबाइल के नोटिफिकेशंस पर नज़रें गड़ाए रहते हैं, जिससे उनका ध्यान केंद्रित होने की बजाय लगातार भटकता रहता है। मोबाइल के नोटिफिकेशन बंद कर देना इसका हल है।